मंगल मूरत, विघ्न हरो
हे दशरथनंदन, तू दुख भंजन, प्रभु रघुनंदन, सुखदायी । कौशल्यानंदन, हर उर स्पन्दन, कष्ट निकन्दन, अहिशायी।। हे शतदल लोचन, तू दुखमोचन, हे रामलला, वनगामी। अधिपति तुम्हीं नाथ , मुझे दो साथ , थाम लो हाथ, हे स्वामी।। मारक खरदूषण, रघुकुल भूषण, मंगल मूरत विघ्न हरो। सज्जन प्रतिपालक, दुर्जन घालक, जन हितकारी, मग्न करो।। शबरी को तारे, संत उबारे, आजानुबाहु, अवतारी। सबको है तारा, सबका प्यारा, मुझे उबारो, बलिहारी।। तू मुरलीधारी, कृष्ण मुरारी, ग्वाल सखा तुम, त्रिपुरारी। हे संकटहर्ता, पालनकर्ता, हे सुखकारी, गिरधारी।। हे दीन दयाला, नटवर लाला, नित-नित तेरा, नमन करूँ। हे देवकीपुत्र, आंनन्दकंद, दिल में तेरा, ध्यान धरूँ।। नरेन्द्र सिंह
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