परशुराम
जय रेणुका के वीर सुत,साक्षात नारायन स्वरूप ज्ञानी महा,योद्धा महा,दर्शन से जिसके मिलता सुख। परशु से जिसके सर्वदा,तम मिटे अन्याय का चेला भी जिसका योद्धा महा,हो कर्ण,भीष्म और द्रोण सा अवतार चाहे कृष्ण का,हो मत्स्य या फिर राम का या हो चिरंजीव रूप प्रभु जी,आपका परशुराम का कर लो प्रभु स्वीकार,वंदन, तुच्छ बालक दास का। ज्ञान दो बल,मान दो,प्रभु तम से सबको तार दो जमदग्नि नंदन, हे प्रभु जी,हमको यही वरदान दो। ................उत्पल
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