एक कवि
कभी सोचा है कि कोई रचनाकार क्यों लिखता है ? कभी सोचा है कि वह अपने भावों को एक धागे में क्यों पिरोता होता है ? कभी सोचा है कि वो हमेशा अपनी कलम को इतनी मान्यता क्यों देता है ? कभी देखा है उसको लिखते हुए कि वह अपने भावों को कैसे लिखता है? और कभी देखा है उसको रोते हुए ? या कभी देखा उसको ठीक से हंसते हुए ? इन सब का जवाब है=नहीं .! अरे क्यों देखोगे तुम उस कलमकार को !जो अपने भावों को दिल से निकाल के शब्दों में लिखता है ओर क्यों सोचोगे तुम उस रचनाकार के लिए ! जो अपनी रचना में हर भाव को लिखता है ओर कभी जरूर सोचना ! उस कवि के लिए जो अपने भावों को शब्दों मे लिखता है 🌞 सुधीर मैठाणी🌸
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