जयकरी छंद/चौपई छंद
शीर्षक :भोर प्रतिदिन मानो नूतन भोर, ईश्वर खींचे जीवन डोर। प्रभु की माया अपरम्पार, वही दिए हैं प्राण उधार।। दो दिन की है साँसे मात्र, जबतक जिंदा रहें सुपात्र । जो भी करना सोच विचार, मन को रखना निर्मल यार।। रिक्त हस्त जब स्वर्ग प्रयाण,बदन छोड़कर जाता प्राण। जीवन मानो प्रभु का दान, भाव प्रेम का रखना ध्यान।. लोभ अहं का कर दो त्याग,ईर्ष्या ममता छोड़ो राग। स्मरण रहे यह दिल में मर्म, मानव सेवा उत्तम धर्म।। नरेंद्र सिंह *
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