छुपन छुपाई ☺️
⏳ दिन बीत गए पर नज़रें आपसे ना मिली, ⏰ घंटे बन गए दिन, और दिन बन गई सदियाँ — जब नज़रें आपसे ना मिली। 🌑 लगता है अंधेरे सा, और हो चुकी है सादगी, 🌫️ लगता है अंधेरे सा, और हो चुकी है सादगी, 👀 जब नज़रें आपसे ना मिली... जब नज़रें आपसे ना मिली। 🚇 वो छुपन-छुपाई जो हम DMRC में खेला करते थे, 🚪 एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक आँखों से बात किया करते थे। 👣 जब मेरी उपस्थिति का ज्ञात होता था आपको, तो तीसरे दरवाजे पर आप जाया करते थे। 📍 फिर Greater Kailash के प्लेटफॉर्म पर उतरकर... चुपचाप check किया करते थे। 🫂 मन करता है वो छुपन-छुपाई फिर से खेलूं, 🫀 अंदर है बहुत कुछ समेटा हुआ, पर बातें मैं कैसे बोलूं? 💔 ग़म आपके सारे हो जाएं हमारे, ये मैं सह लूं, 💔 ग़म आपके सारे हो जाएं हमारे, ये मैं सह लूं... 🥺 पर बिना आपकी आँखों से बात किए कैसे रह लूं? 🥺 पर बिना आपकी आँखों से बात किए कैसे रह लूं? 🤷♂️ कैसे रह लूं... बताइए... कैसे रह लूं?
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