बस की यात्रा और बारिश
बस की खिड़की से झाँकता मुस्कान, बारिश की बूँदें छेड़ें सुरमई गान। घटा घिरी, मौसम की थिरकन, धरती पर छाई हरियाली की चादर। सड़क पर छप-छप करती पायल, पेड़ों की शाखों पर नाचती अठखेलियाँ। बस की सीट पर बैठे हम, मन में उमंग, जैसे बचपन का सपना। बूँदें गिरें, जैसे मोती की लड़ी, आसमान से धरती को चूमे बूँदें बड़ी। बस की गति में हल्का हिलना, बारिश में भीगता ये नज़ारा अद्भुत। हर मोड़ पर जैसे नई कहानी, बारिश में रंगी, बस की यात्रा सुहानी। दिल में बस जाए ये दृश्य अपार, बस की यात्रा में बरसे आनंद की फुहार।
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