जनाजा
हाय कितना खूब बरसा गया आसमान कितना खून रोया गया आज यहाँ । वाह खुलासा-ए -चेहरा तेरा जीते जी मार दिया जाना । क्यों अब तलक ये दर पर्दा तुमको तो इश्क था ना ? ना ही दिखाता तेरे राज ओ दिल यकीं मेरा यूं लाश ना होता ना । हाय ये चलता फिरता जनाजा क्या बात है तेरी जो माना ना । हुई क्या मुझसे खता कुछ ? तू एक बात तो करता ना । यहां अब बसर नहीं हो रहा और न मुझे कही जाना ना । है इस कोने का दिल शुक्रगुजार कोई मुझे पनाह तो देता ना । क्यों किया मेरे दिल पे वार मेरी जान सुकून ऐ मौत देता ना।।।।।।।।।। दीपज्योति
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