अधूरा इश्क
हसकर कर दिया हमने अपना हक अदा, ना कोई उम्मीद और ना किसी सहारे की जरूरत; बस एक बेइंतेहा मोहब्बत जो दोस्ती में ही समाप्त हो गई।
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