दिव्य दृष्टि
आंखों चमक उठी उनकी एक झलक से, कुछ इस तरह की रात के अंधेरों में नैन बंद कर भी उन्हीं की छवि नजर आए। मोह की काया पलटी और दिल काबू से फिसल चला। सपने सजाए तो हजारों सुनहरे पर एक चुटकी बाजी और कल्पना की दुनिया हकीकत से कोसों दूर मालूम हुई।
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