अधूरी......
अधूरी ही तो रह गई वो दास्ता....... जो कह ना पाये हम और सुन ना पाये तुम... शब्द आवाज खोज ना पाये पन्ने पर हम उतार ना पाये कांपते हाथो ने तहरीर लिखने का कलम जाने कहा गुम कर दिया सोचा था महसूस कर लोगे तुम शायद नसो की वो कडी कही छुट गई..... दुख तो नही, एक इंतजार था पर तेरी आंखो मे इस बार वो इसरार ना था...
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