रोला :प्रभु हैं प्रतिपालक
मानव ईश्वर अंश, व्याप्त हैं ये जग सारा । सब हैं मनु का वंश, जाति का क्यों बँटवारा।। मालिक दाता एक, प्राण जो सबको देते। उनका करना ध्यान, कष्ट जो हैं हर लेते।। जग के मालिक राम,वही हैं सबके पालक। उनसे रखना स्नेह, ईश हैं संकट घालक।। नर तन जो यह श्रेष्ठ, वही तो हैं निर्माता। नित-नित करो प्रणाम, पूज्य ये भाग्य विधाता।। पालें प्रभु संसार, वही हैं मात्र सहारा । सदा उन्हें दे मान,रचे जो विधान न्यारा ।। किया करो शुभ कार्य, उन्हें ही है खुश रखना। देगें वे आशीष, कर्म फल उत्तम चखना।। नरेन्द्र सिंह
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