" भारत भूमि "
भारत भूमि जान से प्यारी है शान इसकी जगत में न्यारी है जाने कितने फूलों से है सजी रंग बिरंगी महकती यह फुलवारी है । उत्तर में हिमालय दक्षिण में रामेश्वरम संतों की भूमि, दर्शन इसका अध्यात्म राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर के ज्ञान से सजी परम उद्घोष सत्यम शिवम सुंदरम । छः ऋतुओं की जलवायु जो कहीं नहीं गंगा, यमुना अनेक सरिता हिमालय गोद से बही धर्म ,ज्ञान, दर्शन की खान है अजंता ,एलोरा की गुफाएं मूर्ति कला से हैं सजी । सनातन धर्म जो सबसे पुरातन धर्म है धर्म से भी बढ़कर यहां श्रेयकर कर्म है शरणागत की रक्षा आन वीरों की है यहां राष्ट्र को मातृभूमि समझना सबसे विचित्र मर्म है । धरती की रज को तिलक सा भाल पर साजते मंदिरों में शंख, घंटा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाजते हर मंदिर वास्तु की दृष्टि से निर्मित है हुआ पूजा,अर्चना, विधि विधान की महत्ता वैज्ञानिक भी ना काटते । पेड़ों को देवों सा आदर यहाँ है दिया जाता ग्रहों, नक्षत्रों को भी अर्चन है किया जाता धरती को माँ सम्मान यहां हैं मानते नदियों का जल अमृत मानकर है पिया जाता । अनेक शूरवीरों ने अपने प्राणों का बलिदान है दिया तब जाकर भारत ने स्वतंत्रता का स्वाद है चखा महापुरुषों और विदुषियों से गौरवान्वित मेरी मातृभूमि जिन्होंने संसार को उत्थान और ज्ञान दिया ।।
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