अधुरी मोहब्बत
अधुरी मोहब्बत का दर्द किसे सुनाए हम अगर इज़हार-ए- मोहब्बत किया होता तो यु तकलीफ मे तो न जीते हम तेरी मुस्कुराहट का कायल ये दिल अब तन्हाई मे फूट फूट कर रोता है क्या शिद्धत वाला इश्क कुछ ऐसा ही होता है रूह पर लगे है जो ज़ख़्म भर नही पाते है किसी गैर के हाथों से मरहम भी तो नही लगवाते है अब तो जो वक़्त भी गुजर जाए ये ही दुआ मेरी रब से है अपने पास बुला ले, मुझे मेरी मौत का इंतज़ार कब से है यु रह रह कर तड़पना मुझे से बर्दास्त नही होता अगर तुम होती मेरे पास तो तुम्हारी गोद मे सर रख कर सोता तुम्हारा वो मुस्कुराना बेवजह पलट कर देखना याद आता है क्यु मेरा ही दिल तेरी याद मे गम ए जुदाई सेहत है तुम्हारा यु छोड़ कर चले जाना दिल को बड़ा दर्द याद देता है ओर हमे मालूम है तलक हक़ीकत अब हमारा महबूब किसी और की पन्हागह मे रहता है
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