' प्रतिभाशाली स्त्री'
सच कहूँ, नहीं कर पाया कोई प्यार। ऐसी औरत से, जो जिवन के मायने जानती हो। अपनी प्रतिभाओं को बखुबी पहचानती हो, तर्क के साथ बात कहाना उसकी खूबी हो, बेवज़ह किसी के सामने नतमस्तक ना होती हो।। अकेले रहना, उसका हुनर हो। बेखौफ हो, क़ाबिलियत जिसकी छवि हो। ज़माने को जो समझती हो, दिखावा चले ना जिसपे, छलावे से जो डरती हो। बेखौफ आजादी से जो चालती हो, हक से बातें कहाना वो जाने, अपने अधिकारों को जो समझती हो।। शवाम की चाय में चाशनी घोल कर, जो बातें मानवाना ना जानती हो। अपने लिए जो बोल सके, ग़लत बात पर जो अपना मुँह खोल सके। सूरज को जो घंटों तकती हो, सब कह जाने का जो हुनर रखती हो। चाँद की चाँदनी से जिसकी दोस्ती हो, तारों में जो सुकून ढूंढती हो। प्रतिभाशाली स्त्री से प्रेम करना, आसान नहीं होता। प्रेम तो कर जाते हैं लोग, लेकिन निभाना सभ के बस काम नहीं होता ।। - रिमझिम
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