मुक्तक
रात, रात में बात छुपी है उजियारे की, माचिस की तीली बात करे बस अंगारे की । अग्नि देवता के कारण ही भोजन मिलता है सबको, यज्ञ हवन से पूरी होती इच्छाएं मन से हारे की । - कवि शैलेंद्र सिंह चंदेल
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