खीलाप
खीलाप ===================== खीलाप है ये जग सरा फीर भी, प्यार अमर है एक गाथा, हिर रांजा क्या लैला मजनु क्या, सब एक ही है प्रेम की भाषा. खीलाप है सब फीर भी, आमर है ये प्रेम गाथा. ईतीहास काल की बाजीराव मस्तानी, आभी आभी की लेलो,. वासु, सपना, आमर है ये कहानी. प्यार पुजा है......, फीर भी प्यार से नफरत क्यु, जमाने तेरी प्यार पर...., ईतनी सोच खीलाप है क्यु. प्रेम से ही जीता जाता, हर सवाल का जवाब, फीर भी प्रभु तेरी लीला, ईतनी बदनाम है क्यु. प्रेम पुजा है तो ये दुनिया, इतनी खीलाप है क्यु, इतनी खीलाप है क्यु. `````````````````````````````````````````` =====================
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