प्रेम के खत
संध्या के सुनहरे छांव का आशय लिए रोज लिख डालती हूँ मैं अपने डाई शब्द प्रेम के, कि कभी तो उन्हें आज़मके आएगा मेरा राजकुमार किस्मत की वादियों को चीरकर मुझे यहां से दूर, बहुत दूर ले जाएगा।
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