जनम के कहानी
जखनी जनम ले ली हल हम्म जुड़वा , बड़ सोर मचल हल मगही में। जेठरइयत घर जुड़वा बेटा होलइ , हल्ला हल भेलइ मगही में।। अखनी तक नै जनमल हल दुगो साथे सभे चेहा हला मगही में। जने सुनs तने सगरो येके बतिया, घर घर चरचा हल मगही में।। अधरात में दुगो बेटा भेलो, डगरीन बोलला मगही में। सबेरे से ही ऊ बाबुजी,चचा से, नेग मांगे लगला मगही में।। माघ इंजोरिया अठमी एतवार केशो जी कहलका मगही में। जजमान समवत साल 2014 हो, गरह गोचर बाचलका मगही में।। जबसे जनमली तबसे सुनली, सभे के बात हम्म मगही में। मुँह हम्मर जखनी खुलल हल त मा बोलली हल मगही में।। घर परिवार आउ टोला पड़ोस, सभे बोलs हला मगही में। गुरूजी के नगीच पढ़े गेली त उहो बोलs हला मगही में।। मगही हम्मर लोहु में रचल बसल, जे हम्म बोलs ही मगही में। जे जे हs सभे खाटी मगहिया , त तू लिखs,बोलs,मगही में।। नरेंद्र सिंह, मोहनपुर,अतरी, गया 10.01.2024
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