अविरल प्रवाह:
"मन, शांत चंचल निर्मल अविरल प्रवाह सा है. अनुराग-विराग प्रेम सौंदर्य लौकिक बहाव सा है। द्वेष विदेश ईर्ष्या जलन चित्त व्यथित धारा किनारा सा; हर्ष आनन्द परम स्वरूप निर्मल गंगा प्रवाह सा है।। मन ,शांत चंचल निर्मल अविरल प्रवाह सा है..."
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
