उल्लाला छंद
शीर्षक- संध्या वंदन आरती माता तू वरदायिनी,वीणा पुस्तक धारिनी। आओ ज्ञान भरो जरा, मैं नालायक हूँ डरा ।। संध्या वंदन आरती,भजन करूँ मैं भारती। ले लो अपनी गोद में,झूमू हर दम मोद में।।1।। आकर देवी तार दें ,भारी संकट टार दें । मैं क्या था क्या हो गया,भाग्य चमक क्यों खो गया।। माता पर ही आस है, अटल यही विश्वास है। विनती मेरी आपसे, मुक्त करें इस शाप से।।2।। नरेंद्र सिंह 21.02.2025
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
