शुरुआत
न राह देखी ,न मंजिल देखी.. न कश्ती देखी न नाव देखी न उभरती सी कोई आह , इसपे सवार देखी।। न जन्नत देखी न कायनात देखी न मन्नत देखी न शौहरत देखी, ... मुर्शीद!!! मैंने तो बस खामोशी से अपने उस, अनकहे शोर की अंदर ही दफन होती मजार देखी👀🌛
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