" ज़िद "
मोहब्बत में हार भी मंज़ूर है, बस शर्त ये है, के तेरे दिल में न कोई और तस्वीर रहे। तू न मेरी बने, मगर औरों की भी न हो, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। तेरे ख्वाबों से ही आबाद हैं मेरी रातें, तेरे नाम से ही जुड़ी हैं मेरी बातों की बातें। तू मेरे पास न सही, यादों में तो रहे, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। हर दुआ में तुझे ही मांगता हूँ मैं, हर खुशी में तेरा नाम सुनता हूँ मैं। तू न जाने भी तो सही, दिल से न जाए, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। तेरी हँसी की रौशनी अब भी जलती है, मेरे अंदर एक उम्मीद सी पलती है। तू भले दूर रहे, रूह में न रहे दूरी, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। मैंने तुझमें खुदा देखा है हर बार, तेरे इनकार में भी था मेरा इकरार। तू अगर किसी और का नाम ले, तो टूट जाऊँ, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। तेरे आने की कोई आस नहीं अब, पर तेरी यादों से भी कोई खफा नहीं अब। बस एक इल्तजा है, वफ़ा का मज़ाक न बने, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी। तेरे बिना भी जी लूँगा, मगर अधूरा सा, तेरी तस्वीर बसी रहे इस सीने के कोने में ख़ास। तू जिए खुश रहे, पर किसी और के साथ नहीं, वरना ये इश्क़ नहीं, सिर्फ़ एक ज़िद कही जाएगी।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
