पनाह
गहराई आसमा कि किसी के आँखों से मत नापो.. मैं आसमा उसकी आँखों में खोजता हूँ... फिर रहा हूँ रोजगार को जितनी भी जगह मैं... सब्र कर आशियाने मैं अपने मन के खुद ही तोड़ता हूँ
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