आशा
लटके, उदासीन चेहरों मे हताशा देख रही हूँ खड़े होकर मैं भीड़ का तमाशा देख रही हूँ जाने कितनी बार हार समेटे खड़े है लोग यहाँ फिर भी कुछ कर गुजरने की आशा देख रही हूँ
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