कैसे भूलूं तुम्हे ?
कैसे भूलूं वो बाते जिसे सुन हम सोया करते थे काश रातें और लंबी हो या सुबह ही ना हो ऐसा सोचा करते थे वो तेरा डांटना की "चुप सो जा" ऐसा सुन प्यार और जताया करते थे कैसे भूलूं तुम्हें मानता हूं मैने दिल तेरा दुखाया बहुत है पर ये भी तो है की प्यार जताया बहुत है पर अफसोस इसका कोई गम नहीं तुम्हें मैं अब भी सोचता हूं कैसे भूलूं तुम्हें सुनो कभी याद तो आती होगी ना मेरी मैं तो आज भी सुनता हूं आवाजे तेरी कभी सपनो में तो कभी खुली आंखों में देखता हूं हर रोज तस्वीरें तेरी अब जब खो चुका हूं तुम्हे तो बस इतना ही कहूंगा की खुश रहना कभी याद आए मेरी तो पलकें ना भिगोना खुश रहना मैं भी कभी याद ना आऊं तुम्हें ये दुआ करूंगा हमेशा बनी रहे तेरी खुशी ये दुआ करूंगा अब तो उलझा सा गया हूं खुद के जिंदगी में कोई सहारा भी नहीं है इस गुमनाम जिंदगी में खैर तुम्हे इस जहां की हर खुशी मुबारक हो तेरी हर खुशी में मौजूद सारा जमाना हो मैं तो बस उस पल को सोचता हूं कब आखिरी सांस लूं और मुझे शमशान जाना हो।।
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