एक अजनबी
एक अजनबी से दिल लगा बैठा मैं, फिर अपना हाल संभालता रह गया। जब दिल काबू में न आया, उसका घर-आंगन ढूंढता रह गया। और जब ये एहसास हुआ मुझे, कि जिस गली में उसकी खिड़की थी, उस गली में बहुत से पेड़ उसको छाँव देते थे। उन्हीं पेड़ों ने मुझसे कहा, "लो, तुम भी आ गए अपने दिल का जनाज़ा लेकर।" @Satyam
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