वो
शहर की भीड़ में वह चेहरा कहीं खोया हुआ सा है, मगर उसकी आँखों में एक गहरा समंदर सोया हुआ सा है। बचपन की उन गलियों से, माँ की उस थपकी से दूर, वह निकल आया है, होकर अपने ख्वाबों के लिए मजबूर। वह घर की उम्मीदों का बस्ता, उसने कंधों पर उठाया है, थक गया है पाँव मगर, फिर भी मुस्कुराना सिखाया है, उसे फोन से नफरत है, उसे बात करना रास नहीं आता, शायद डरता है कि आवाज़ लड़खड़ाई तो घर याद आ जाएगा। इसलिए वह खामोश रहता है, अपनी दुनिया में मस्त, किताबों के पन्नों में डूबा हुआ, वक्त के साथ पस्त। जब भी कोई उसे देखता है, उसकी आँखों में ठहर जाता है, उन गहरी आँखों में जैसे कोई पुराना किस्सा उतर आता हैl पन्नों की खुशबू उसका सुकून है, तरक्की की राह पर चलना, बस यही उसका जुनून है। वह शांत है, जैसे झील का ठहरा हुआ सा पानी, पर उस ठहराव के पीछे छुपी है एक लंबी कहानी। वह किसी से अपना दर्द, अपनी तकलीफ़ नहीं बाँटता, अकेलेपन की रातों को वह चुपचाप है काटता। सबसे बड़ा फनकार है वह, जो हर गम को छुपा लेता है, अपने टूटे हुए दिल पर, वह हँसी का लेप लगा लेता है। "लोग कहते हैं कितना खुशमिजाज है यह लड़का,पर कोई नहीं जानता, उसकी मुस्कान के पीछे कितना अंधेरा है कड़ा।"
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