नदी
एक नदी जो लहरों के साथ बह रही थी। वो न जाने क्यू ठहर गयी, रास्ता था उसके चारो तरफ फिर क्यू वो ऐसे सहम गयी किस सोच मे वो डूबी है? उसने तो बस बहना सिखा है कल कल की आवाज़ के साथ। पहाड़ों पर रहना सिखा है फिर उस पर क्या ऐसी बीती जो उसकी बहती धारा शांत हो गयी मस्त मगन थी जो अपने धुन मे क्यू उसको ऐसी चुप्पी भा गयी? और ये नदी के लिए नही लिखा है।
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