अध्यापक
वो मिले थे एक कठिन सफर के दौरान हम भी पढ़े थे किसी कोने में बेजान उनके आने से बेजान पढ़े हम में भी जान आगई उन्होंने हममे एक नई आशा की किरण जगाई हमको लगाया गले से इस कदर मानो जानते हो सदियों से इस कदर उनपर हमें खुद से जयादा भरोसा हुआ उन्होंने हज़ारो बाते सिखादि हमसे गलतियों का टाला छीन कर बुलंदियों की चाभी थमा दी काश!! हर किसी को इनके जैसे अध्यापक मिले और भगवन इनको सलामत रखे बिना उनका नाम लिए मेने उनको ये कविता सोप दी काश वो इसको पढ़ कर समझ पाए वो इज़्ज़त जो हमने इनकी झोली में दाल द।।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
