देश भक्ति पर दोहे
तिरंगा शान देश की, अपनी है पहचान। घर घर यह छत पर रहे,है भारत की शान।। तिरंगा बस झुके नहीं,झुके नहीं निज शीश। शान इसी मे देश की,बल देना जगदीश।। जान तिरंगे पर सदा,करते हैं कुरबान। लहरे यह घर घर सदा,देते हैं हम ध्यान।। लिये तिरंगा हाथ में,घूमे सारा शहर। जुड़ता गया वजूद सब,अजब गजब थी लहर।। जान निछावर कर गये,जो भारत के लाल। उन की हिम्मत देख कर,हम तो हुए निहाल।। कसम कुराने पाक की,लेते हैं हम आज। झंडा ऊँचा रहे सदा,जाँ देंगे इस काज।। भारत से है प्यार और,झंडे से है प्यार। शान बचाने देश की,रहते हम तैयार।। ऊपर अपनी जान से,है यह अपना देश। झंडे से भी प्यार है,शंका कब लवलेश। । बुरी नज़र जिस ने रखी,फोड़ी उसकी आँख। गिरा ज़मीं पर तड़प कर,काटे उस के पाँख ।। गुस्ताखी अब शान में,कब होती है सहन। वरना अब तू समझ ले,मुश्किल होगी रहन।। देश भक्त घर घर रहें,यही हमारी माँग। फैंकें गे हम काट कर,अगर अड़ाई टाँग।।
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