दिव्य शक्ति
ध्यान में मगन हो खुशी की गीत गुनगुनाते हर मुसीबत के पहाड़ को कुचलते हुए मन के रास्ते पर अविराम चल पड़ती। रास्ते में हो चाहे कितनी भी बाधाएं, हालातों ने बना दी हो कितनी भी ज़जीरे या नामुमकिन सी हो कोई पहली, सामने हो जो भी मुकाबला, निडर हो लड़ती है यह हौसलों की शहजादी।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
