मध्यांतर
खड़े हैं उम्र के आधे पड़ाव में सोचते हैं बीते सफर को भी देखते हैं सामने अवसर को भी क्या किया क्या अनुभव लिया। अब तक का सफर शानदार रहा है उपलब्धियों से संतोष का संचार हुआ है दिव्य अनुभव, कोटि जनों का आशीर्वाद हर संचय के लिए कठिन प्रयास किया है। अंतिम पग मृत्यु का आलिंगन होगा चेहरे पर संतुष्टि शांति का भाव होगा अंतिम पग के लिए तैयार रहना होगा जब भी आए समय बस चल चलना होगा। आधा सफर बाकी है इसमें क्या करना होगा अंतिम पग पूरे मन से संतुष्टि से शांति से बढ़ाऊं इसके लिए बहुत परिश्रम अब और करना होगा अधूरे योजनाओं के लिए अब संघर्ष तेज करना होगा । शिव, भारत, बेरासों और आत्म इन सबको साथ पिरोना होगा समय कम है और काम ज्यादा प्रबंधन अब तो ठीक करना ही होगा ।
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