तुझे याद नहीं आती क्या मेरी
कि तुझे याद नहीं आती क्या मेरी, क्या दिल दुखता नहीं तेरा, कि रात गुजर जाती है आसानी से क्या तेरी, क्या शाम को वापस घर लौटने का मन नहीं होता, तुमने जो जो कहा था बुराई हैं मुझमें, वो मिटा कर जीना मेरा जिंदगी का उद्देश्य बन गया, पर तुझसे मिलना आज भी एक सपना बन गया। कि तुझे मेरे बाद कोई पसंद आएगा क्या, क्या बनजाएगा किसी ओर का तू? ये सोचते सोचते मेरे दिन और रात गुजरती हैं। क्या तुभी नहीं सो पाता रातों को।।
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