विष्णु पद छंद( गीत )
शीर्षक-- घर आँगन महके। लौट चलो सब गाँव की ओर, वहीं रहो गहके। गाँवो में हरियाली लाना, घर आँगन महके।। बदलो अब तो भेष विदेशी, रहो कृषक बनके। छोड़ो शहरी झूठा वैभव, गाँव सदा खनके।। कौवा-मैना घर में आए, चिड़िया फिर चहके। गाँवों में हरियाली लाना, घर आँगन महके।। कोई अतिथि बिना स्वागत के, द्वार अब न तरसे। भिक्षुक साधु न भूखा लौटे, शुभाशीष बरसे।। गूँजे बच्चों की किलकारी, गृह में रह रहके। गाँवो में हरियाली लाना, घर आँगन महके।। चलकर अब तो गाँव सँभालो, अभिमानी बनके। संग रहो मालिक बनकर तुम, खेती हो तनके।। छोड़ो अब ये शहर ठिकाना, तनिक मन न बहके। गाँवो में हरियाली लाना, घर आँगन महके।। नरेन्द्र सिंह,19.06.2025
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