ख़्वाब
ये कैसे ख़्वाब टूटे आंख से खून बहने लगा है । कराह -ऐ -दर्द की चीख से मेरा तो गला छिलने लगा है । करूं दफन ये ग़म गर नहीं नहीं सीना फूलने लगा है । किससे कहूं कि मैं हूं बर्बाद सारा ज़माना हसने लगा है । देख कर अपनी हालत ऐ हाल मेरा ही दिल जलने लगा है । ज्योति
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