अहसास
कितने अहसासो की कहानी लेकर चले इन आंखों में कितना पानी लेकर चले बड़ी लंबी है डगर मेरे- तेरे अपनेपन की ऐसे में किस तरफ ये जिंदगानी लेकर चले महसूस बहुत शिद्दत से होता है वो हर पल में मेरे कहीं ना कहीं है वो दिल का सुकून कह लो इस दिल की फरमाइश कहो गहराई की इस रवानी को कहा्ं लेकर चले आसां किश्तों में कहां निकल पाता है इस रिश्ते का तो लबां ही नजराना है ना शुरु की खबर है ना ही अंत का आभास दिल के चैन का इतना ही फ़साना है आप ही के संग जवानी को कहीं लेकर चले।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
