पलटा-पलटी
कभी इधर को जाते हैं,कभी उधर को जाते हैं; आखिर क्यों नहीं, कहीं भी आप टिक पाते हैं। मानो कभी पक्का आम,कभी टिकोले खाते हैं; क्या मजबूरियां है जो यूँ हिचकोले खाते हैं-2 ये पलटा-पलटी का ये खेल क्यों खेला करते हैं; कभी इधर ,कभी उधर का स्वाद क्यों चखते हैं। आपको पलटू राम कहें या कुर्सी कुमार ही कहें; आखिर कब तक हम बिहारी,आपको सहते रहें। घोड़ा,रोटी और पान को पलटने के बारे में सुना है; इस कहावत में चौथा आपका नाम लोग चुना है। नरेंद्र सिंहः 28.12.2023
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