स्वतंत्र प्रेम
खुद को भूल जाऊँ किसी को पाने में, ऐसा भी नहीं चाहिए मुझे इस ज़माने में | कोई ऐसा हो कि उसके भी अपने सपने हो कई, मेरे सपने और उसके सपने कभी टकराये नहीं | वो साथ चले पर सहारा न बने , मैं उसका हो जाऊँ पर बोझ न बने , रिश्ते में मोहब्बत हो मजबूरी नहीं, दिल जुड़े दोनों का पर दूरी नहीं | वो समझे मेरी खामोशी के अल्फाज , मैं भी पढ लु उसके दिल का राज, न जीत हो किसी की, न हार हो कहीं, बस दोनों के मुस्कान का इकरार हो कहीं | न ज्यादा वादे,ना झूठी कसमें , बस सच्चा सा साथ हो हर पल में , ऐसी मोहब्बत हो जहां दोनों आज़ाद रहे, पर फिर भी एक दूसरे के पास रहें | Rajnish kashyap ki kalam se 🙏
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
