मेडिकल कॉलेज की भीड़
मेडिकल कॉलेज में भीड़ देखकर गदगद हो गए। कि अब कमी ना रहेगी डॉक्टर की।। हर चार कदम पर डॉक्टर मिलिहिए। बिना इलाज के कोई ना मरीहिए।। पर अब कॉलेज में चेहरे बदले। अबकी दफा तो दोगुने बढे।। सब पिछलों ने क्लीनिक खोले। किसी ने एकल ,तो किसी ने साझेदारी से खोल।। अब हर चार कदम पर एक क्लीनिक। उसमें बैठे चार डॉक्टर।। डॉक्टर सारे शहर में बस गए। मरीज बेचारे बाढ़ में फंस गए।। डॉक्टर तो पहले से काफी है बढे। पर इलाज शायद सभी के हिस्से ना पड़े।। अस्पतालों की भी लगी है मंडी। अगर बड़ी है गाड़ी, बड़ा है रूतबा। तब इस मंडी में चार है खींचे।। पर निर्धन, निर्बल,असहाय को कोई न पूछे। सब बिक गई खेती,बिक गई बाड़ी,डॉक्टर साहब तो मोलभाव ना करते।। डॉक्टर को दिया था भगवान का दर्जा। पर यह भगवान तो पैसे को सिंचे।।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
