आई आपदा
आई आपदा बस आई आपदा गजब की माया, गजब की काया, चाहा जिसको सुधार के रास्ते पर लाया, देखा आसमान से लगाता बड़ा सयाना, सामन देख लगा गलत निगाह पड़ी, आई आपदा बस आई आपदा। टिप टप बारिश के बूंद जमीन पर, पड़े ऐसे देखें इधर जिधर, जमीन पर पड़ बन मोती चमका, चमका कोई हीरा न हो, सामने देख लगा गलत निगाह पड़ी आई आपदा बस आई आपदा। थी वो बीती बरसात जैसी, रहती तो बनती बाधा, ... न रहती तो दिक्कत बूंद की आगमन से बाग बाग सी सामने देख लगा गलत निगाह पड़ी आई आपदा बस आई आपदा। धरा अपना, होती न बूंद तो हम बस जाता अपनो मे, कहती बूंद धरा से, हूं मेहमान बनकर, कुछ दिन सह लिए, बरसकर चल लिए भर भर खुशी दी अब बस चल लिए सामने देख लगा गलत निगाह पड़ी आई आपदा बस आई आपदा।
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