श्रद्धेय जयशंकर प्रसाद जी
धन्य है जिनकी कालजयी रचनाएं और कलम; वैसे महान युगपुरुष को, असंख्य है मेरा नमन। इनका जन्म 30 जनवरी उन्नीस सौ नब्बासी में; बाबू देवी प्रसाद और मुन्नी देवी के घर काशी में। श्रद्धेय जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रवर्तक थे; ये महान ओजस्वी कवि और युग के प्रवर्तक थे। लेखक,कहानीकार,उपन्यासकार,नाटककार थे; ये कथा और निबंध के अद्वितीय शिल्पकार थे। आध्यात्म,प्रेम और सौंदर्य के प्रेमी और प्रेरक थे; ये राष्ट्रप्रेम व उदार मानवतावाद के उत्प्रेरक थे। अपने कृतित्व से ये साहित्य को अलंकृत किए; साहित्यिक विधाओं से जगत को झंकृत किए। हिंदी की अखंडज्योति ये,जिनकी रश्मि प्रचंड है; हिंदी काव्यलोक के अप्रतिम तेजोमय मार्तंड हैं। नरेंद्र सिंह
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