मेरा उत्तराखंड ❤️🫶...
आओ तुम्हें जन्नत की सेर कराऊं ले चलू एक सफर में... जहां की घाटियां मानो तुम्हे बुला रही हो जहां रुई जैसे बर्फ से फूलों जैसा स्वागत हो जहां की बाल मिठाई तुम्हारे स्वागत के इंतजार में हो जहां की पावन गंगा तुम्हारे शरीर के कण – कण को उजागर कर दे जहां की तीर्थ स्थल तुम्हारी श्रद्धा को बड़ा दे।। जहां की हवाएं तुम्हे खींच कर अपने पास बुला रही हो।। जहां के फूल वातावरण में घुलकर अपना परिचय खुद देते हो जहां का पानी भी अमृत हो जहां सुविधाएं कम पर सुकून मिले जहां का परिचय खुद वातावरण देता हो जहां चारों ओर हरियाली छाई हो जहां मान्यता है देवी — देवताओं की जहां छवि है हमारे पूर्वजों की।। जहां की सुबह चिड़ियों के चहकने और ठंडी हवाओं से हो जहां पर्वत भी कोसों ऊंचे हो।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
