जिद
गर वो ज़िद्दी है, तो मैं भी अड़ियल हूं देखना है ये द्वंद कबतक चलेगा । बुझ नहीं सकता दीया मेरे उम्मीद का, ये जलता रहा है, और यूं ही जलेगा । पकड़ के रखूंगा मैं भी गिरेबा मुकद्दर का, तबतक जबतक, ये सूरत-ए-हाल नहीं बदलेगा ।।
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