गुलाम ए इश्क
जीना सिखा कर आधे रास्ते छोड़ गए वही आसू पीने जिनको आजमाकर हंसना सीख लिया था। होटों की मुस्कुराहट चाहकर भी दिल का दर्द छुपा ना पा रही। आंखो की चमक के पीछे बहते अश्क नजर आ ही जाते। पर इस इश्क का भोज सिर्फ मेरे सर है तुम पर इसका साया भी ना पढ़ा।
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