राहत की सास
सूर्योदय से सूर्यास्त की भगदड़ में जिंदगी गुजरती चली जा रही। सोच विचार करके ध्यान से बनाई योजनाएं समय के सामने फीकी पड़ गईं, और सारे जुगाड लगाके जीवन की गाड़ी रफ्तार पकड़ नही पा रही। सब कह सुनकर दिन के अंत में दिल की बस एक पुकार रह जाती, दो शरण का ठहराव मिले जिससे दिमाग की बत्ती जले।
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