नटखट
डेढ़ साल की नटखट छोरी, घर में मचाए शोर। कभी गिरे, कभी भागे, कभी रोए, कभी जागे। चीजें फेंके, तोड़े-मरोड़े, दीवारों पर रंग बिखेरे। खिलौनों से करे लड़ाई, माँ की साड़ी खींचे भाई। दादा-दादी को खूब सताए, अपनी तोतली बोली से हँसाए। पर जब करे वो प्यारी मुस्कान, सब हो जाते हैं हैरान। छोटी शैतान, बड़ी ही प्यारी, घर की सबसे दुलारी। उसकी हर शरारत में छुपी है मासूमियत, जो दिल को छू जाती है हर वक़्त।
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