उल्लाला छंद
मधुर वचन अनमोल हैं मानव वाणी बोलिए, पहले उसको तौलिए। सत्य अरुचिकर त्याग दें , बोल मधुर रस पाग दें ।। उर में शीतलता रहे, निसृत शब्द जो सब सहे। गीता पुराण का कथन, बोलें न कभी कटु वचन।। वचन बड़े अनमोल हैं, अगर मधुर रस घोल हैं। प्यारे बोली बात हो, शब्द से न आघात हो।। नम्र सदा बनकर रहें, कड़वी बोली मत कहें। हरपल इसका ध्यान हो, वाणी से पहचान हो।। नरेंद्र सिंह
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