मेरे हम सफर
इक रोज चांद छत जो मिला तो पूछा मैंने हाल खबर । क्या दिखा तुम्हें कोई नूर ए जहां तुम जाते तो हो कई शहर। वो बोला बेहद पागल हो भला नाम पता बतलाओ तो । मैं किसकी दे दूं तुमको खबर जरा नूर मुझे भी दिखाओ तो । मैंने सोचा अब क्या मैं कहूँ वो सुन्दर सजल सयाना है । है दूर बहुत वो मुझसे पर ख्वाबों में आना जाना है । चाँद जरा सहमा बोला तू रोज सिफारिश करता है । तू जिसके ऊपर मरता है वो जाने कितनों पर मरता । चल तूने पूछा हाल खबर तो बस इतना बतलाता हूं । वो रोज मिले मुझे नयी गली मैं जिस भी गली में जाता हूँ ।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
