अनकहे अल्फ़ाज़!!
कुछ बात है जो कहनी है तुमसे, सुनोगे क्या? तन्हा हो गई हु बहुत मेरे बनोगे क्या? तेरी आंखों की गहराई में डूब जाना है मुझे, मेरी मुस्कुराहट की वज़ह बनोगे क्या? कब तक करू बहाने तुमसे बात करने की, दिल से दिल का नज़राना दोगे क्या? थोड़ी कमज़ोर हु दिल के मामले में, तुम मुझे और मेरे दिल को संभाल पाओगे क्या? हूं थोड़ी सी जिद्दी और नासमझ भी, तुम मुझे समझा पाओगे क्या? डरती हूं दूरियों से और तुम्हे खोने से, तुम मेरी परेशानियां मिटा पाओगे क्या? नहीं बांट सकती तुम्हे किसी और से, तुम सिर्फ मेरे रहोगे क्या? हो जाए जो कभी गलतियां मुझसे, मेरी गलतियों को माफ कर, मुझे अपना पाओगे क्या? हां!!!! कहती हूं आज, बेइंतहां मोहब्बत हो गई है तुमसे, क्या तुम मेरे इस तन्हा सफर में मेरा हाथ थामोगे क्या??? 🫶🤌
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