पूज्य और निकृष्ट धनी
1.पूज्य धनी जब ज्ञान का भंडार हो, सम्पत्ति का अम्बार हो। दानी बहुत उत्कृष्ट हो, मानव बड़ा वह शिष्ट हो।। जग में सदा उतरे खरा, पूजे उसे सारी धरा। समझो मनुज वह ज्येष्ठ है, प्राणी वही तो श्रेष्ठ है।। 2.निकृष्ट धनी पाकर अगर अत्यल्प धन, समझे स्वयं को श्रेष्ठ जन । खोकर सभी संस्कार को, तुच्छ समझे संसार को।। रहता अहं में चूर हो, लत से सदा मजबूर हो।। चाहे रहे अल्पज्ञ वह, बूझे स्वयं सर्वज्ञ वह। नरेंद्र सिंह 28.02.2025
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